शासकीय पट्टे की 4.047 हेक्टेयर जमीन अवैध बिक्री का मामला, चार लोगों पर FIR

रायगढ़। ग्राम मेढ़रमार में शासकीय पट्टे की भूमि को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना बेचने और खरीदने का मामला सामने आया है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धरमजयगढ़ के आदेश के बाद राजस्व निरीक्षक की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार ग्राम मेढ़रमार, प.ह.नं.-36, तहसील धरमजयगढ़ स्थित खसरा नंबर 25/1/क/11, रकबा 4.047 हेक्टेयर भूमि शासकीय पट्टे की है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार उक्त भूमि का मूल मिशल वर्ष 1930 में बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज था।
जांच में सामने आया कि प्रथम शासकीय पट्टेदार राजनन्दन सिंह के वारिस नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र प्रताप सिंह, निवासी इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश), ने कथित तौर पर सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए बिना 15 मार्च 2021 को पंजीकृत विक्रय विलेख के जरिए उक्त भूमि को राजेश अग्रवाल और बजरंग लाल अग्रवाल को 16 लाख 29 हजार रुपये में बेच दिया।
मामले में राजस्व विभाग द्वारा शासकीय अभिलेखों की जांच की गई। जांच के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय से 4 अगस्त 2026 को थाना धरमजयगढ़ को FIR दर्ज करने के लिए पत्र भेजा गया। पत्र में बताया गया कि भूमि का क्रय-विक्रय छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158 एवं 165 (7-ख) के प्रावधानों का उल्लंघन है।
राजस्व निरीक्षक रामकुमार राम की शिकायत पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धारा 420, 34 IPC के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की है। राजस्व विभाग ने विक्रेताओं, खरीदारों के साथ ही मामले में संलिप्त अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध भी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है।
अब पुलिस विक्रय विलेख, राजस्व अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ ही भूमि के अवैध हस्तांतरण में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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