रायगढ़ । धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र अंतर्गत आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मृत्यु की घटना के बाद वन विभाग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। विभाग द्वारा हाथियों की सुरक्षा एवं मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को मजबूत करने के उद्देश्य से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी एवं प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा हाथियों के नियमित विचरण वाले क्षेत्रों, तालाबों एवं जल स्रोतों का चिन्हांकन कर उनकी सतत निगरानी की जा रही है। विशेष रूप से ऐसे जलाशयों की पहचान की जा रही है, जहां छोटे हाथी शावकों के फंसने अथवा दुर्घटना की आशंका हो सकती है। आवश्यकता अनुसार ऐसे स्थलों पर सुरक्षित ढलान, पहुंच मार्ग एवं अन्य सुरक्षा उपाय विकसित किए जाएंगे, ताकि हाथियों को जल स्रोतों तक सुरक्षित पहुंच मिल सके।
वनमंडलाधिकारी धरमजयगढ़ जितेंद्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि आमामुड़ा तालाब में हाथी शावक की मृत्यु की घटना अत्यंत संवेदनशील एवं दुखद है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर पूरी रात स्थिति की निगरानी की गई तथा वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति में सभी आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की गई। उन्होंने बताया कि शावक की मृत्यु के वैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को सैंपल भेजे गए हैं तथा रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग द्वारा विशेष रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।
वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने बताया कि हाथियों के विचरण वाले संवेदनशील क्षेत्रों एवं जल स्रोतों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। ऐसे तालाबों एवं जलाशयों की पहचान की जा रही है, जहां हाथी शावकों के फंसने अथवा दुर्घटना की आशंका हो सकती है। आवश्यकता अनुसार सुरक्षित ढलान एवं पहुंच मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। हाथी मित्र दल, ट्रैकर एवं वन अमले की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए ट्रैप कैमरा, ड्रोन एवं थर्मल ड्रोन तकनीक का उपयोग बढ़ाया गया है, जिससे किसी भी असामान्य गतिविधि की समय पर जानकारी प्राप्त हो सके और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
घटना के बाद वन विभाग ने राष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ समन्वय बढ़ाते हुए वैज्ञानिक अध्ययन एवं निगरानी प्रणाली को भी और मजबूत करने की पहल की है। विभाग द्वारा हाथियों के व्यवहार, विचरण मार्ग एवं संवेदनशील स्थलों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर दीर्घकालिक संरक्षण रणनीति तैयार की जा रही है। वनमंडलाधिकारी श्री उपाध्याय ने कहा कि वन विभाग हाथियों की सुरक्षा एवं संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक संरक्षण योजना पर कार्य कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। वन विभाग ने आमजन से भी अपील की है कि हाथियों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखें तथा किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल वन अमले को दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हाथी शावकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग सतर्क, जलाशयों एवं हाथी विचरण क्षेत्रों की होगी विशेष निगरानी, ट्रैप कैमरा, थर्मल ड्रोन एवं रात्रि गश्त किया जा रहा और मजबूत
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