रायगढ़ जिले के पुसौर में ‘सेवा’ के बीच भाजपा में बगावत! पुसौर के 8 पार्षदों ने छोड़ी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर रायगढ़ भाजपा को सियासी झटका, नगर पंचायत अध्यक्ष की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी; जिला अध्यक्ष को भेजे इस्तीफे
रायगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जहां रायगढ़ जिले में ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत और 5 लाख दीप जलाने की तैयारियां हैं, वहीं इसी दिन पुसौर नगर पंचायत से भाजपा के भीतर बड़े असंतोष की खबर सामने आई है। नगर पंचायत के 8 भाजपा पार्षदों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की जानकारी दी है। सभी पार्षदों ने अपना इस्तीफा जिला भाजपा अध्यक्ष अरुणधर दीवान को भेजा है।
एक तरफ सिंदूर पार्क में 40 हजार से अधिक दीयों से रायगढ़ को रोशन करने की तैयारी है और जिलेभर में 5 लाख दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ पुसौर की यह घटना स्थानीय भाजपा संगठन में अंदरूनी नाराजगी को लेकर सवाल खड़े कर रही है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलना है।
8 पार्षद एक साथ क्यों हुए नाराज?
सामूहिक इस्तीफे की वजह के तौर पर नगर पंचायत अध्यक्ष मानी मोहित सतपथी की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को लेकर असंतोष सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्षदों का आरोप है कि क्षेत्र में अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं और इसी मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ती गई।
पुसौर नगर पंचायत में कुल 15 निर्वाचित वार्ड हैं। ऐसे में भाजपा से जुड़े 8 पार्षदों का एक साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हालांकि, इन इस्तीफों का अंतिम राजनीतिक असर आगे संगठन के निर्णय और पार्षदों के अगले कदम पर निर्भर करेगा।
दीपों की रोशनी के बीच संगठन के सामने बड़ा सवाल
आज रायगढ़ में ‘आशीर्वाद का दीया उत्सव’ के तहत सिंदूर पार्क में शाम को 40 हजार से अधिक दीप जलाए जाने हैं। जिले में कुल 5 लाख दीप प्रज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगे।
ऐसे में पुसौर से सामने आया सामूहिक इस्तीफा भाजपा संगठन के लिए असहज करने वाला घटनाक्रम जरूर है। खास तौर पर तब, जब नाराजगी किसी विपक्षी दल के नेताओं की ओर से नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े निर्वाचित पार्षदों की ओर से सामने आई है।
अब नजर संगठन की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा संगठन इन इस्तीफों को किस रूप में लेता है और नाराज पार्षदों के साथ बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की कोशिश होती है या नहीं। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस्तीफों के बाद स्थानीय राजनीति और नगर पंचायत के समीकरण पर आगे की परिस्थितियों का असर देखा जाना बाकी है।
यानी रायगढ़ में आज एक तरफ ‘आशीर्वाद के दीये’ जलेंगे, तो दूसरी तरफ पुसौर में भाजपा के भीतर असंतोष की आग संगठन के लिए नई चुनौती बनकर सामने आई है।

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