1800 से अधिक विद्यार्थी हो रहे लाभान्वित, नए सत्र में शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार
रायगढ़ । अदाणी पावर लिमिटेड, रायगढ़ की सामाजिक पहल के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा संचालित उत्थान परियोजना अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ पर रायगढ़ क्षेत्र के 34 विद्यालयों में शाला प्रवेशोत्सव एवं पालक-शिक्षक बैठकों का आयोजन किया गया। परियोजना के तहत वर्तमान में 22 प्राथमिक, 8 पूर्व माध्यमिक तथा 4 हाई स्कूल शामिल हैं, जिनमें 1800 से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं।
प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशी विद्यार्थियों का स्वागत किया गया और अभिभावकों को बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं समग्र विकास के महत्व की जानकारी दी गई। रनभांठा, कोतमरा और सरवानी सहित विभिन्न विद्यालयों में आयोजित बैठकों में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, शाला प्रबंधन समिति के सदस्यों तथा अभिभावकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन, अनुशासन तथा विद्यालय और समुदाय के बीच बेहतर समन्वय को लेकर विस्तृत चर्चा की गई, साथ ही अभिभावकों की भागीदारी को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
अदाणी फाउंडेशन की उत्थान परियोजना के माध्यम से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधारभूत अधोसंरचना तथा शिक्षण-सहायक संसाधनों को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। इस पहल के तहत पहले ही स्कूलों में स्मार्ट टीवी, डेस्क-बेंच, स्कूल बैग, स्टेशनरी सामग्री और पुस्तकालय संसाधन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में भी विद्यार्थियों को स्कूल बैग, स्टेशनरी किट और अन्य आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बड़े भंडार, बुंगा, सुपा और चंदली के हाई स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा।
अदाणी फाउंडेशन का मानना है कि शिक्षा सामाजिक विकास का एक प्रभावी माध्यम है। इसी सोच के साथ फाउंडेशन शिक्षा, अधोसंरचना विकास और नवाचार आधारित पहलों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे उन्हें अनुकूल शिक्षण वातावरण और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल सकें।
प्रमुख वक्तव्य:
अदाणी फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने कहा,
“उत्थान परियोजना के माध्यम से हमारा प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।”
स्थानीय जनप्रतिनिधि ने कहा,
“शाला प्रवेशोत्सव और पालक-शिक्षक बैठक से अभिभावकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इससे बच्चों की नियमित उपस्थिति और अध्ययन में सुधार देखने को मिलेगा।”











