रायपुर। दिसंबर माह में आयोजित पटवारियों को आरआई परीक्षा फार्म भरवाने के बाद जनवरी माह में आयोजित की गई जिसका परिणाम विधानसभा खत्म होते ही दूसरे दिन 29 फरवरी को घोषित कर दिया गया। उक्त परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होनें तथा सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे जाने के कारण हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई पर हाईकोर्ट से इसमें स्टे नही मिल पाया है। बताया जा रहा है कि इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर न केवल गडबडी की गई बल्कि परिवारिक लोगों को चयन करके लाखों रूपये की वसूली भी की गई है।
इस संबंध में मुंगेली के रहने वाले विवेक दीक्षित ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश सहित माननीय न्यायधीश के अलावा केन्द्रीय सचिवालय नई दिल्ली, पर्वतन निदेशालय राज्यपाल छत्तीसगढ़ व मुख्यमंत्री सहित एक दर्जन लोगों को लिखित शिकायत के जरिये इस परीक्षा में हुई धांधली की जांच तथा लेनदेन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि पीएससी घोटाला से मिलता जुलता यह घोटाला छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा नौकरी के नाम पर अपने परिवार तथा चहेते लोगों को पटवारी से आरआई बनाने का है जिसकी जांच में बड़े खुलासे होनें की संभावना है। शिकायत करने वाले विवेक दीक्षित ने अपनी शिकायत में लिखा है कि 2014 से लगभग 9-10 वर्षो से रमेश शर्मा भू-अभिलेख संचालक के पद पर बने हुए हैं। 1-2 टर्म को छोडत्रकर वह प्रभार लगातार उसके पास है इसी विभाग में अधीन छत्तीसगढ़ राज्य का संपूर्ण राजस्व अभिलेखों का मेंटनेंस होता है जिसमें करोड़ो रूपया महिना शासन मेंटनेंस एजेंसी को देती है।
दिसंबर माह में राज्य भर में पटवारियों से आरआई परीक्षा का फार्म भरवाया गया था एवं जानकारी में परीक्षा आयोजित की गई तथा विधानसभा खत्म होनें के दूसरे ही दिन 29 फरवरी को परिणाम घोषित किया गया। उक्त परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होनें तथा सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे जाने के कारण हाइकोर्ट में याचिकायें लगाई गई परंतु स्टाय नही मिल पाया। उक्त परीक्षा का आयोजन विभाग द्वारा स्वयं किया गया किसी स्वतंत्र एजेंसी व्यापक या किसी भी अन्य विभागीय प्रणाली द्वारा नही कराया गया। विभाग के कर्मचारियों द्वारा प्रश्नपत्र तैयार किया गया एवं उन्हीं के द्वारा जांच कर परिणाम घोषित किया गया।
संचालक रमेश शर्मा के विश्वासपात्र हेमंत कौशिक डीएसएलआर द्वारा इस परीक्षा का पेपर लीक किया गया एवं केवल 2 संभाग बस्तर से 54 तथा सरगुजा से 92 का एक हाल में बैठाकर सामूहिक नकल कराकर पास कराया गया है इनके द्वारा परीक्षा के पूर्व बस्तर सरगुजा का दौरा किया गया जो कि इनके मोबाईल लोकेशन या काल डिटेल से प्रमाणित हो जाएगा। परीक्षा में 10 लाख रूपये का लेनदेन कर शासन के अंदर ही भ्रष्टाचार कर भ्रष्ट सिस्टम बनाने का यह सामुहिक अनोखा मामला है। इस चयन सूची में पति पत्नी तथा सगे भाई लोग अधिकतर चयनित है जो पारिवारिक रूप से ही परीक्षा कक्ष में बैठाये गए थे था इस चयन सूची में आरक्षण रोस्टर का भी बिल्कुल पालन नही किया गया। केवल सरगुजा संभाग में 200 में से 92 का चयन होना संदेहास्पद है।
मुंगेली के रहने वाले विवेक दीक्षित ने पेपर लीक एवं सामूहिक नकल के इस प्रकरण की सूक्ष्मता से जांच कर शासन स्तर पर होनें वाले इस भ्रष्टाचार को रोकते हुए अपराधियों के उपर दण्डात्मक एवं कानूनी कार्रवाई करने एवं आरआई परीक्षा निरस्त कर आरआई प्रशिक्षण रोके जाने हेतु आदेश जारी करने की मांग की गई है।




