रायगढ़। वनमंडल धरमजयगढ़ के अंतर्गत वन परिक्षेत्र छाल में तैनात हाथी मित्रदल एवं वनकर्मियों ने अपनी तत्परता और साहस का परिचय देते हुए एक ग्रामीण युवक की जान बचा ली, जो जंगली हाथियों के दल से आमने-सामने हो गया था।
वनमंडलाधिकारी धरमजयगढ़ ने जानकारी देते हुए बताया कि 12 सितम्बर की रात्रि हाथी मित्रदल एवं वनकर्मी, छाल परिक्षेत्र अंतर्गत एडूकला गांव की ओर से लोटान होकर जंगली हाथियों की गतितिविधयों की सूचना देते हुये गश्ती करते आ रहे थे। देउरमार आने के बाद उन्हे सूचना मिली कि घरघोड़ा परिक्षेत्र की ओर से 48 हाथी देउरमार में प्रवेश कर रहा है। तत्काल हाथी मित्रदल एवं वनकर्मी देउरमार पहुंचे, जहां पर उन्होंने देखा कि ग्राम देउरमार के ग्रामीणों के भीड़ द्वारा उक्त जंगली हाथियों को लगतार शोरगुल मचाकर कर जंगल की ओर आगे भगाने का प्रयास कर रहे थे। तभी गश्ती दल द्वारा मौके पर पहुंच कर आवाज देकर ग्रामवासियों को समझाया जा रहा था कि आप लोग अपने-अपने घर चले जायें। चूंकि इस प्रकार से शोरगुल करने पर हाथी उग्र हो जाते है। तभी अचानक हाथियों के दल में से 01 नग नर हाथी अत्यधिक उग्र होकर वापस मुड़कर ग्रामीणों की ओर दौड़ पड़ा, जिसे ग्रामीण इधर-उधर भागने लगे। इसी भाग-दौड़ में पवन कुमार राठिया पिता पिलीराम राठिया, उम्र 21 वर्ष, निवासी देउरमार जमीन पर गिर पड़ा और हाथी उनके समीप ही पहुंच गया था। तब हाथी मित्रदल एवं वनकर्मी, पूरी तत्परता से हाथी मित्रदल वाहन से हाथी के पीछे-पीछे मौका स्थल की ओर वाहन का हूटर बजाते हुये गये। जिससे जंगली हाथी जमीन पर गिर हुये व्यक्ति को छोड़कर जंगल की ओर चला गया।
हाथी के जंगल की ओर जाने के बाद उक्त युवक को शासकीय वाहन से आवश्यक ईलाज हेतु चिकित्सालय पी.एच.सी.छाल में वन परिक्षेत्राधिकारी छाल, हाथी मित्रदल एवं वनकर्मी द्वारा रात्रि के लगभग 1.00 बजे लाया गया। प्राथमिक चिकित्सा के बाद आवश्यक जांच हेतु पवन कुमार राठिया को 13 सितम्बर को प्रातरू चिकित्सालय खरसिया रिफर कर दिया गया।
इस प्रकार हाथी मित्रदल एवं वनकर्मी की तत्परता से ही उक्त व्यक्ति की जान बचाई गई। हाथी मित्रदल, वनकर्मचारी एवं अधिकारी द्वारा ग्रामीणों को लगातार वन्यप्राणी जंगली हाथियों के समीप न जाने, उसे न भगाने की लगातार समझाईस दी जा रही है एवं वन्यप्राणी जंगली हाथियों के प्रत्येक गतिविधियों की जानकारी ग्रामीणों को विभिन्न माध्यमों से दी जा रही है।
