रायगढ़। सांप का नाम सुनते और देखते ही लोग सिहर उठते हैं अगर बात एशिया के सबसे जहरीले सांप की करें तो डरना स्वाभाविक है। डेढ़ महीना तक एक पानी टंकी में गिरे भूखे प्यासे और घायल रसेल वाइपर को रायगढ़ एनिमल सेवा समिति की टीम ने सुरक्षित बाहर निकालकर उसका इलाज करके उसे नई जिंदगी देने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रायगढ़ एनिमल सेवा समिति के धर्मेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि भगोरा गांव के पास मजदूरों के लिये नहाने के लिये बनाये गए पानी टंकी में डेढ़ महीना से रसेल वाइपर जहरीला सांप गिरा हुआ था। कुछ बच्चों ने पत्थर मारकर इसे घायल कर दिया था। गांव के ग्रामीणों की सूचना के बाद वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और इस सांप का सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया गया और दो दिनों तक सांप को सुरक्षित रखकर उपचार किया गया जिसके बाद संबलपुरी के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया है।
पूर्वांचल इलाकों में संख्या अधिक
धर्मेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि कोतरलिया, जुर्डा, पतरापाली, टारपाली, तिलगा, भगोरा, लोईंग, महापल्ली के अलावा पहाड़ मंदिर के पीछे के अधिकांश गांव में रसेल वाइपर सांप अधिकतर पाये जाते हैं। बताया जाता है कि खासकर ठंड के समय ये सांप निकलते हैं और खेत में अधिक मिलते हैं। धान काटते समय अधिकांश लोग इसका शिकार हो जाते हैं। चूंकि धान में इनका कलर मिल जाता इसलिये लोग इसे देख नही पाते।
अंडा नही सीधा बच्चे देता है यह सांप
धर्मेन्द्र सिंह राजपूत ने बताया कि रसेल वाइपर एशिया के सबसे जहरीले सांप में से एक है। यह अन्य सांपों की भांति अंडा नही देता सीधा 50 से अधिक बच्चे देते हैं। इसलिये इनकी संख्या में इजाफा होते जा रहा है। इस सांप के विष में हेमोटोक्सिक तत्व पाया जाता है, जो शरीर के खून और ऊतकों पर गहरा असर डालता है।
